कुछ सुहागरात सा भाग २


कुछ सुहागरात सा भाग २



“भैया ! बहुत अच्छा है… मोटा है… लम्बा है… ओह्ह्ह्ह्ह !”
उसने अपना पजामा नीचे सरका दिया तो वो नीचे गिर पड़ा। फिर उसने अपनी छोटी सी अण्डरवियर भी नीचे खिसका दी। उसका नंगा लण्ड तो बिल्कुल मोमबत्ती जैसा नहीं था राम… !! यह तो बहुत ही गुदगुदा… कड़क… और टोपे पर गीला सा था। मेरी चूत लपलपा उठी… मोमबती लेते हुये बहुत समय हो गया था अब असली लण्ड की बारी थी। उसने मेरे पाजामे का नाड़ा खींचा और वो झम से नीचे मेरे पांवों पर गिर पड़ा।
“दीदी चलो, एक बात कहूँ?”
“क्या…?”

“सुहागरात ऐसे ही मनाते हैं ! है ना…?”
“नहीं… वो तो बिस्तर पर घूंघट डाले दुल्हन की चुदाई होती है।”
तो दीदी, दुल्हन बन जाओ ना… मैं दूल्हा… फिर अपन दोनों सुहागरात मनायें?”
मैंने उसे देखा… वो तो मुझे जैसे चोदने पर उतारू था। मेरे दिल में एक गुदगुदी सी हुई, दुल्हन बन कर चुदने की इच्छा… मैं बिस्तर पर जा कर बैठ गई और अपनी चुन्नी सर पर दुल्हनिया की तरह डाल ली।
वो मेरे पास दूल्हे की तरह से आया और धीरे से मेरी चुन्नी वाला घूँघट ऊपर किया। मैंने नीचे देखते हुये थरथराते हुये होंठों को ऊपर कर दिया। उसने अपने अधर एक बार फ़िर मेरे अधरों से लगा दिये… मुझे तो सच में लगने लगा कि जैसे मैं दुल्हन ही हूँ। फिर उसने मेरे शरीर पर जोर डालते हुये मुझे लेटा दिया और वो मेरे ऊपर छाने लगा। मेरी कठोर चूचियाँ उसने दबा दी। मेरी दोनों टांगों के बीच वो पसरने लगा। नीचे से तो हम दोनो नंगे ही थे। उसका लण्ड मेरी कोमल चूत से भिड़ गया।
“उफ़्फ़्फ़… उसका सुपारा… ” मेरी चूत को खोलने की कोशिश करने लगा। मेरी चूत लपलपा उठी। पानी से चिकनी चूत ने अपना मुख खोल ही दिया और उसके सुपारे को सरलता से निगल लिया- यह तो बहुत ही लजीज है… सख्त और चमड़ी तो मुलायम है।
“भैया… बहुत मस्त है… जोर से घुसा दे… आह्ह्ह्ह्ह… मेरे राजा…”

मैंने कैंची बना कर उसे जैसे जकड़ लिया। उसने अपने चूतड़ उठा कर फिर से धक्का मारा…
“उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़… मर गई रे… दे जरा मचका के… लण्ड तो लण्ड ही होता है राम…”
उसके धक्के तो तेज होते जा रहे थे… फ़च फ़च की आवाजें तेज हो गई… यह किसी मर्द के साथ मेरी पहली चुदाई थी… जिसमें कोई झिल्ली नहीं फ़टी… कोई खून नहीं निकला… बस स्वर्ग जैसा सुख… चुदाई का पहला सुख… मैं तो जैसे खुशी के मारे लहक उठी। फिर मैं धीरे धीरे चरमसीमा को छूने लगी। आनन्द कभी ना समाप्त हो । मैं अपने आप को झड़ने से रोकती रही… फिर आखिर मैं हार ही गई… मैं जोर से झड़ने लगी। तभी लक्की भी चूत के भीतर ही झड़ने लगा। मुझसे चिपक कर वो यों लेट गया कि मानो मैं कोई बिस्तर हूँ।
“हो गई ना सुहाग रात हमारी…?”
“हाँ दीदी… कितना मजा आया ना…!”

“मुझे तो आज पता चला कि चुदने में कितना मजा आता है राम…”
बाहर बरसात अभी भी तेजी पर थी। लक्की मुझे मेरा टॉप उतारने को कहने लगा। उसने अपनी बनियान उतार दी और पूरा ही नंगा हो गया। उसने मेरा भी टॉप उतारने की गरज से उसे ऊपर खींचा। मैंने भी यंत्रवत हाथ ऊपर करके उसे टॉप उतारने की सहूलियत दे दी।
हम दोनो जवान थे, आग फिर भड़कने लगी थी… बरसाती मौसम वासना बढ़ाने में मदद कर रहा था। लक्की बिस्तर पर बैठे बैठे ही मेरे पास सरक आया और मुझसे पीछे से चिपकने लगा। वहाँ उसका इठलाया हुआ सख्त लण्ड लहरा रहा था। उसने मेरी गाण्ड का निशाना लिया और मेरी गाण्ड पर लण्ड को दबाने लगा।
मैंने तुरन्त उसे कहा- तुम्हारे लण्ड को पहले देखने तो दो… फिर उसे चूसना भी है।
वो खड़ा हो गया और उसने अपना तना हुआ लण्ड मेरे होंठों से रगड़ दिया। मेरा मुख तो जैसे आप ही खुल गया और उसका लण्ड मेरे मुख में फ़ंसता चला गया। बहुत मोटा जो था। मैंने उसे सुपारे के छल्ले को ब्ल्यू फ़िल्म की तरह नकल करते हुये जकड़ लिया और उसे घुमा घुमा कर चूसने लगी। मुझे तो होश भी नहीं रहा कि आज मैं ये सब सचमुच में कर रही हूँ।
तभी उसकी कमर भी चलने लगी… जैसे मुँह को चोद रहा हो। उसके मुख से तेज सिसकारियाँ निकलने लगी। तभी लक्की का ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा। मुझे एकदम से खांसी उठ गई… शायद गले में वीर्य फ़ंसने के कारण। लक्की ने जल्दी से मुझे पानी पिलाया।
पानी पिलाने के बाद मुझे पूर्ण होश आ चुका था। मैं पहले चुदने और फिर मुख मैथुन के अपने इस कार्य से बेहद विचलित सी हो गई थी… मुझे बहुत ही शर्म आने लगी थी। मैं सर झुकाये पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गई।
“लक्की… सॉरी… सॉरी…”

“दीदी, आप तो बेकार में ही ऐसी बातें कर रहीं हैं… ये तो इस उम्र में अपने आप हो जाता है… फिर आपने तो अभी किया ही क्या है?”
“इतना सब तो कर लिया… बचा क्या है?”
“सुहागरात तो मना ली… अब तो बस गाण्ड मारनी बाकी है।”
मुझे शरम आते हुये भी उसकी इस बात पर हंसी आ गई।
“यह बात हुई ना… दीदी… हंसी तो फ़ंसी… तो हो जाये एक बार…?”
“एक बार क्या हो जाये…” मैंने उसे हंसते हुये कहा।
“अरे वही… मस्त गाण्ड मराई… देखना दीदी मजा आ जायेगा…”
“अरे… तू तो बस… रहने दे…”
फिर मुझे लगा कि लक्की ठीक ही तो कह रहा है… फिर करो तो पूरा ही कर लेना चाहिये… ताकि गाण्ड नहीं मरवाने का गम तो नहीं हो अब मोमबत्ती को छोड़, असली लण्ड का मजा तो ले लूँ।
“दीदी… बिना कपड़ों के आप तो काम की देवी लग रही हो…!”
“और तुम… अपना लण्ड खड़ा किये कामदेव जैसे नहीं लग रहे हो…?” मैंने भी कटाक्ष किया।
“तो फिर आ जाओ… इस बार तो…”
“अरे… धत्त… धत्त… हटो तो…”
मैं उसे धीरे से धक्का दे कर दूसरे कमरे में भागी। वो भी लपकता हुआ मेरे पीछे आ गया और मुझे पीछे से कमर से पकड़ लिया। और मेरी गाण्ड में अपना लौड़ा सटा दिया।
“कब तक बचोगी से लण्ड से…”

“और तुम कब तक बचोगे…? इस लण्ड को तो मैं खा ही जाऊँगी।”
उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद में मुझे घुसता सा लगा। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
“अरे रुको तो… वो क्रीम पड़ी है… मैं झुक जाती हूँ… तुम लगा दो।”
लक्की मुस्कराया… उसने क्रीम की शीशी उठाई और अपने लण्ड पर लगा ली… फिर मैं झुक गई… बिस्तर पर हाथ लगाकर बहुत नीचे झुक कर क्रीम लगाने का इन्तजार करने लगी। वह मेरी गाण्ड के छिद्र में गोल झुर्रियों पर क्रीम लगाने लगा। फिर उसकी अंगुली गाण्ड में घुसती हुई सी प्रतीत हुई। एक तेज मीठी सी गुदगुदी हुई। उसके यों अंगुली करने से बहुत आनन्द आने लगा था। अच्छा हुआ जो मैं चुदने को राजी हो गई वरना इतना आनन्द कैसे मिलता।
उसके सुपारा तो चिकनाई से बहुत ही चिकना हो गया था। उसने मेरी गाण्ड के छेद पर सुपारा लगा दिया। मुझे उसका सुपारा महसूस हुआ फिर जरा से दबाव से वो अन्दर उतर गया।
“उफ़्फ़्फ़ ! यह तो बहुत आनन्दित करने वाला अनुभव है।”
“दर्द तो नहीं हुआ ना…”
“उह्ह्ह… बिल्कुल नहीं ! बल्कि मजा आया… और तो ठूंस…!’
“अब ठीक है… लगी तो नहीं।”
“अरे बाबा… अन्दर धक्का लगा ना।”
वह आश्चर्य चकित होते हुये समझदारी से जोर लगा कर लण्ड घुसेड़ने लगा।
“उस्स्स्स्स… घुसा ना… जल्दी से… जोर से…”
इस बार उसने अपना लण्ड ठीक से सेट किया और तीर की भांति अन्दर पेल दिया।
“इस बार दर्द हुआ…”
“ओ…ओ…ओ… अरे धीरे बाबा…”
“तुझे तो दीदी, दर्द ही नहीं होता है…?”
“तू तो…? अरे कर ना…!”
“चोद तो रहा हूँ ना…!”

उसने मेरी गाण्ड चोदना शुरू कर दिया… मुझे मजा आने लगा। उसका लम्बा लण्ड अन्दर बाहर घुसता निकलता महसूस होने लगा था। उसने अब एक अंगुली मेरी चूत में घुमाते हुये डाल दी। बीच बीच में वो अंगुली को गाण्ड की तरफ़ भी दबा देता था तब उसका गाण्ड में फ़ंसा हुआ लण्ड और उसकी अंगुली मुझे महसूस होती थी। उसका अंगूठा और एक अंगुली मेरे चुचूकों को गोल गोल दबा कर खींच रहे थे। सब मिला कर एक अद्भुत स्वर्गिक आनन्द की अनुभूति हो रही थी। आनन्द की अधिकता से मेरा पानी एक बार फिर से निकल पड़ा… उसने भी साथ ही अपना लण्ड का वीर्य मेरी गाण्ड में ही निकाल दिया।

बहुत आनन्द आया… जब तक उसका इन्टरव्यू चलाता रहा… उसने मुझे उतने दिनों तक सुहानी चुदाई का आनन्द दिया। मोमबत्ती का एक बड़ा फ़ायदा यह हुआ कि उससे तराशी हुई मेरी गाण्ड और चूत को एकदम से उसका भारी लण्ड मुझे झेलना नहीं पड़ा। ना ही तो मुझे झिल्ली फ़टने का दर्द हुआ और ना ही गाण्ड में पहली बार लण्ड लेने से कोई दर्द हुआ।… बस आनन्द ही आनन्द आया… ।

एक वर्ष के बाद मेरी भी शादी हो गई… पर मैं कुछ कुछ सुहागरात तो मना ही चुकी थी। पर जैसा कि मेरी सहेलियों ने बताया था कि जब मेरी झिल्ली फ़टेगी तो बहुत तेज दर्द होगा… तो मेरे पति को मैंने चिल्ला-चिल्ला कर खुश कर दिया कि मेरी तो झिल्ली फ़ाड़ दी तुमने… वगैरह…
गाण्ड चुदाते समय भी जैसे मैंने पहली बार उद्घाटन करवाया हो… खूब चिल्ल-पों की…
आपको को जरूर हंसी आई होगी मेरी इस बात पर… पर यह जरूरी है, ध्यान रखियेगा…



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Badi didi Part 1


While driving on main highway, i am on driving seat with my didi, she was unconfirtable while sitting next to me. Didi kaya baat hai? Kuch nahi abhi or litnee door hai? Didi abhi to kam sa kam 5 ghanta lag sakta hayin, acha yahan pass koe rest house ya asee jagha? Didi tum paga ho gee ho, yahan beech rocks, kaya tum sapna dakh rahi ho yahan kon banaa ga rest house, preet (her name) didi huva kaya hai kuch to batao. Chotu mujha chee lagee hai baree zor sa, ha ha ha ha ha ha, to rok kar rakhoo 5 ghanta is sa zayada be lag sakta hayin. Ara chotu toon joke mar raha hai mai serious hoon, ara didi mai garee rokta hoon tum pass main kar lo, nahi nahi mujha dar lagta hai, to fir rok kar rakhoo 5 ghanta. Nahi rok saktee chotu qasam sa mai mazakh nahi kar rahi.

Ok ok, pichee seat ka neecha oil ki khalee bottle paree hai if u dont mind kar lo, ok theak hai stop the car, didi asa he chalee jao, ab roko plz,

Maina garee rokee didi pichlee seat par chalee gee, apni pent ki zip open kar ka panti blue color ki aik side par kar ka, zor ki awaz ana lagi, cheee like this. Almost didi na bottle half ful kar lee thee, didi driving seat ki back side par nahi thee balka dossre side par thee, fir be maina aik bar didi ko peecha mur ka dakha zaroor jab vo neele panti ko aik side par ar rhi thee, magar didi mujha he dakh rahi thee kaheen mai to nahi dakh raha isee leya maina apna dhayan seedha aga ko kar deya, chotu zara mujha tissue pakrana, maina aga dakhta he didi ko 3,4 tissue pakra deya, fir didi na apna bag sa pani ki bottle nikalee or hath dho kar piss wali bottle bahir fank dee or khud aga front par mara sath wapis a gee, fir dash board sa tissue paper daba main sa nikal kar aik lambe sans lee or apna hath saaf kar leya.

Ab garee chaloo karo hama ghar be pounchana hai, didi mujha be che lagi hai na, ap na to bottle be neecha fank dee, ara chotu toon bahir kar a na, kaya toon larkee hai jo maree tarha dar rahi hai? Ara nahi didi. To fir ja kar a, theak hai mai abhi ata hoon, sun ya bottle la ja hath dho lana, theak hai, mai samna parr ka neecha khara ho kar chee karna laga, lakin jaldee main chee karna ka baad zip band karta huva zip kharab ho gee shukar hai underware pehnee thee, magar ab mai sochna laga,

Fir mai jeans ki pent ko theak karta huva driving seat par a kar bath gaya or apni zip par garee ka ganda kapra jis sa mai garee saaf karta tha vo dal leya,

Ara chotu kaya baat hai kaya chupa raha hai, didi maree pent ki zip kharab ho gee hai, oh besharam kahean ka ab apni didi ka sath asa batha ga kaya? Didi majboore hai bura sa moon bana kar mai bola. Ha ha ha chot toon abhi be bacha he hai,

Quain didi kaya huva? Kuch nahi garee chala, rasta main batain karta karta didi so gee, or garee be kafee garam ho chukee thee maina socha pani dal kar thanda kar lata hoon, or maina asa he keya, walsi par darwaza kholta huva didi par aik nazar paree, didi ki eyes closee theen.

Didi ki age to thee 22 magar lagtee zara baree theen. Us ki shirt thoree upar uthee hue thee, or peecha take lana ka karan kafee tight kichee hue thee, un ki body kafee ubrhee hue thee, shahid 32 ka araound thee, fir mareee nazar didi ka nanga badan par paree jahan sa shirt uthee hue thee thoree see, bohat gora badan tha didi ka, koe forignor lagtee thee, fir jab nazar or neecha ae didi ka not too big but enough in tight jeans dakhta he mai to pagal se hona lagi or sochna laga agar ya maree girl friend hote to mai isa abhi kuch kar data, magar mai fir aram sa seat par bath gaya,

Ak baar fir sa didi ki or dakhna laga, didi ki patlee nak or bare bare eyes jo close theen, mota mota lips jis par mehroon color ki lipstic, didi ka nales kafee bara or in par be pink color ki nalepolish, didi na matching main lagae thee, pink coclour ki shirt ka sath, ball khula huva na bohat bara na chota, bus stylish sa, fir maree nazar didi ka foot par paree. Didi na unchee heel wale joote matching main pehnee thee, jab maina joote heel main dakhee to mujha college ki friend yaad a gee jis na 1st time maree petae asee he joote sa kee thee magar ab vo maree best girlfriend hai college main.

Vo baat yaad ae to jaldee sa garee tart kee or sara dhayan driving par divert kar deya, didi maza sa seat peecha kar ka so rahi thee, or mai apna dhayan na chahta huva be didi sa hata nahi pa raha tha,

Wasa mai ap bata doon mai or didi kafee free hayin, french kiss sa hug tak to normal baat hai magar is sa zayada ka kabhi socha be nahi tha, aj quain asa huva i dont no. Fir mai or didi aik sath sota sirf bed alag rehta, didi jab udas hotee to maree goad main sir rakh kar muj sa apni har bat share kartee or mai be same asa he karta.

Mara dil kah raha tha aj kuch garbare ho gee, kuch bohat bura hona ja raha tha, isee soch main blust ki awaz ae, or pata chala garee ka tire panchar ho gaya,

Kaya huva kaya huva chotu. Kuch nahi didi tum so raho tumha kaya laga kaya huva, fir be kaya huva? Ara didi tire blust kar gaya hai, stpny paree hai change kar loon ga dont worry, bus apni neend poore karo,

Is taraf to mara dhayan he nahi gaya, jab didi na apni shirt ka upar wala button band keya, jab band kar rahi thee o maina be note keya ka line to bohat neecha tak nazar a rahi thee, ya kaya maree nazar thee kahan kuch samaj nahi a rahi thee, mai ya soch raha tha ka didi na mujha dakhta huva apna forehead par lines bana kar poocha abha chotu kaya baat hai kahan kho gaya hai? Kuch nahi didi mara dil kah raha hai aj kuch bura hona wala hai, bhagwan sab theak kara ga, bus toon tire change kar da. Maina kar ka wapis a gaya seat par.

Didi ko dakhta huva bole didi tum ho bohat sundar. Hain vo to mai hoon magar achanak mai kahan sa yaad a gee, kaya huva hai tujha? Pata nahi, plz aik baar kiss karo gee. Hain fir didi na mujha jaldee sa cheek par kiss kar dee, ya wali nahi jo mujha ap kartee ho akala main vo wali plz, nahi vo wali ghar ja kar. Nahi abhi nahi abhi plz plz.

Isee beech, mujha zor zor ki didi ki awazain aee, uth ja chotu mom dad nashta par intazar kar raha hayin, maree ankh khulee to samna didi normal kaproon main kharee bol rahi thee mama papa nashta par bula raha hayin ab uth ja,

Kaya didi itna acha sapna dakh raha tha, abhi to ap mujha kiss karna lagi thee, ruk mai tujha abhi kiss kartee hoon, bed par sa palu utha kar mujha marna lagi tuhta hai ya mai bataon tujha, ok ok didi uth raha hoon kabhi kuch acha mat hona da, fir jaldee sa fresh ho kar nashta ki table par pounch gaya, fir mom dad office chala gaa didi na nashta ka barton kitchen main rakh deya jisa mousi dho kar ghar ka kam karna ka baad calee gee or didi be free ho gee,

Mai hamara room main study kar raha tha, didi aram sa room main enter hue mara peecha a kar mujha zor sa apni bahoon main bheench kar boli kiss karoon? Nahi didi fir tum bhag jatee ho or mara dil bura ho jata hai, acha to bata to sahi apni didi ko tara dil kaya karta hai, didi pehla tum batao,

Mara dil onnnnn mara dil karta hai apna bhai ki goad main bath kar dhar saree batain karoon, or dhar saree kiss be, ab toon bata, mara dil asa he batain karna ko karta hai,

Fir didi aga a kar maree goad main gir gee la mai a gee, mara lips par kiss karta huva aik hath maree back par la gae, ara chotu toon apni girl frind ka sath asa he batha tha na last monday college ground main, hain didi asa he, to vo kaya kar rahi thee, kuch nahi didi bus hum asa he natha tha, jhoot mat bol mai dakh rahi thee, such didi mujha nahi pata, bata na kaya kar rahi thee vo, didi kaya tum na nahi dekha tha? Dakha rahi thee magar toon bata,

Didi kaya baat kartee ho shame on u, kiss baat ki shame? Chta bhai sa vo sab pooch rahi ho, to kaya huva bahi ki goad main bath saktee hoon to vo nahi pooch nahi saktee. Bus rehna do kuch or baat karo, ok mai fir ja rahi hoon mujha kuch kam hai. Ok ok batata hoon tum bohat zidde ho didi,

Par didi kaya mai tumha vo sab bataon? Hain sab kuch, didi tum maree real bahan ho to kaya huva tum sirf batao ga, karo ga thoree, acha theak hai, magar aik baat hai na? Ab kaya baat hai, tum aik kam karna na, kal jab mai college jaon ga um chup kar dakh lana, didi maree goad main sa nikal kar boli chal hatt toon budho he raha ga, ya sun kar maina didi ka hath pakar kar fir sa didi ko goad main bethata huva un ka lips par kiss ki or fir cheek par be fir mai bola mai budhoo nahi hoon, but jo tum kah rahi ho us main mujha sharam atee hai, to budho he ho na fir. Nahi hoon budhoo mai, tum budhoo ho, nahi hoon. Jab maina kaha mai budhoo nahi hoon to fir nahi hoon, or jab mai kah rahi hoon tum budhoo ho to tum budhoo ho,

Mujha ghusa a gaya or maina apni pent par didi ka hath rakh kar didi ka hath sa apna land masalna laga, didi kuch na boli bus halkee see muskarahat da rahi thee eyes band kar ka, bus ya sab vo kar rahi thee or mai karva raha tha. Besharam kahean ka bus itna sa he karvaya tha is sa zayada kuch nahi, nahi is sa zayada kuch nahi.

To fir tum dunya ka sab sa bara budhoo ho, to mai kaya karta wahan sab dost tha is sa zayada kuch kar be nahi sakta tha maree sweet didi, to ghar main kar sakta ho na? Hain ya to maina socha nahi, magar mujha nahi pata vo aa ge ya nahi, or tumhara hota huva didi vo nahi aa ge. Ara try karo or bolna mai akala hoon, theak hai,

Fir phone karta huva maina usa bol deya or mara ghar par a jaa mai akala hoon, vo boli mai nahi aj a saktee fir kabhi aa ge, maina wajha pooche to boli mai zara mom ka sath bahir ja rahi hoon, ok theak hai fir kabhi sahi.

(TBC)…

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होली में फट गई चोली


होली में फट गई चोली



मुझे त्योहारों में बहुत मज़ा आता है, खास तौर से होली में.

पर कुछ चीजे त्योहारों में गडबड है. जैसे मेरे मायके में मेरी मम्मी और उनसे भी बढ़के छोटी बहने.
कह रही थी कि मैं अपनी पहली होली मायके में मनाऊँ. वैसे मेरी बहनों की असली दिलचस्पी तो अपने जीजा जी के साथ होली खेलने में थी. परन्तु मेरे ससुराल के लोग कह रहे थे कि बहु की पहली होली ससुराल में ही होनी चाहिये.

मैं बड़ी दुविधा में थी. पर त्योहारों में गडबड से कई बार परेशानियां सुलझ भी जाती है. और ऐसा हुआ भी, इस बार होली २ दिन पड़ी. (दरअसल हिन्दुओं के सारे त्यौहार हिन्दी महीनों (जैसे- चैत्र, वैशाख….आदि) से मनाए जाते है और हिन्दी महीने तारीख से नही बल्कि तिथियों से चलते है. कई बार एक ही दिन और एक ही तारीख को दो तिथि मिल जाती है या एक ही तिथि दो दिनों तक रहती है. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ.)

मेरी ससुराल में 14 मार्च को और

मायके में 15 को होली मनाई जानी थी.

मेरे मायके में जबर्दस्त होली होती है और वो भी दो दिन. तय हुआ कि मेरे घर से कोई आ के मुझे होली वाले दिन ले जाए और ‘ये’ होली के अगले दिन सुबह पहुँच जायेंगे. मेरे मायके में तो मेरी दो छोटी बहनों नमिता और श्वेता के सिवाय कोई था नहीं. मम्मी ने फिर ये प्लान बनाया कि मेरा ममेरा भाई, विक्रम, जो 11वी में पढ़ता था, वही होली के एक दिन पहले आ के ले जायेगा.

“विक्रम की चुन्नी” मेरी ननद सपना ने छेड़ा.

वैसे बात उसकी सही थी. वह बहुत कोमल, खूब गोरा, लड़कियों की तरह शर्मीला, बस यु समझ लीजिए कि जब से वो class 8 में पहुँचा, लड़के उसके पीछे पड़े रहते थे. यूं कहिये कि ‘नमकीन’ और highschool में उसकी टाइटिल थी, “है शुक्र कि तू है लड़का”, पर मैंने भी सपना को जवाब दिया, “अरे आएगा तो खोल के देख लेना, क्या है अंदर हिम्मत हो तो…”

“हाँ, पता चल जायेगा कि नुन्नी है या लंड(penis)” मेरी जेठानी ने मेरा साथ दिया.

“अरे भाभी उसका तो मुंगफली जैसा होगा, उससे क्या होगा हमारा..???” मेरी बड़ी ननद ने चिढ़ाया.

“अरे मूंगफली है या केला..??? ये तो पकड़ोगी तो पता चलेगा. पर मुझे अच्छी तरह मालूम है कि तुम लोगों ने मुझे ले जाने के लिये उसे बुलाने की शर्त इसीलिये रखी है कि तुम लोग उससे मज़ा लेना चाहती हो.” हँसते हुए मैं बोली.

“भाभी उससे मज़ा तो लोग लेना चाहते है, पर हम या कोई और ये तो होली में ही पता चलेगा. आपको अब तक तो पता चल ही गया होगा कि यहाँ के लोग पिछवाड़े के कितने शौक़ीन होते है..???” मेरी बड़ी ननद रानू जो शादी-शुदा थी, खूब मुह-फट्ट थी और खुल के मजाक करती थी.

बात उसकी सही थी.

मैं Flash-Back में चली गई…………………..

सुहागरात के 4-5 दिन के अंदर ही, मेरे पिछवाड़े की शुरुआत तो उन्होंने दो दिन के अंदर ही कर दी थी.
मुझे अब तक याद है, उस दिन मैंने सलवार-सूट पहन रखा था, जो थोड़ा Tight था और मेरे मम्मे(boobs) और नितम्ब खूब उभर के दिख रहे थे. रानू ने मेरे चूतडों पे चिकौटी काटते चिढ़ाया, “भाभी लगता है आपके पिछवाड़े में काफी खुजली मच रही है….? आज आपकी गाण्ड बचने वाली नहीं है, अगर आपको इन कपड़ो में भैया ने देख लिया तो…”
“अरे तो डरती हूँ क्या तुम्हारे भैया से..??? जब से आई हूँ लगातार तो चालू रहते है, बाकि और कुछ तो अब बचा नहीं…… ये भी कब तक बचेगी..???” चूतडों को मटका के मैंने जवाब दिया.
और तब तक ‘वो’ भी आ गए. उन्होंने एक हाथ से खूब कस के मेरे चूतडों को दबोच लिया और उनकी एक उंगली मेरे कसी सलवार में गाण्ड के Crack में घुस गई. उनसे बचने के लिये मैं रजाई में घुस गई अपनी सास के बगल में…..
‘वह’ भी रजाई में मेरी बगल में घुस के बैठ गए और अपना एक हाथ मेरे कंधे पे रख दिया. ‘उनकी’ बगल में मेरी जेठानी और छोटी ननद बैठी थी.
छेड़-छाड़ सिर्फ कोई ‘उनकी’ जागीर तो थी नहीं..??? सासू के बगल में मैं थोड़ा safe भी महसूस कर रही थी और रजाई के अंदर हाथ भी थोड़ा bold हो जाता है. मैंने पजामे के ऊपर हाथ रखा तो उनका खुटा पूरी तरह खड़ा था. मैंने शरारत से उसे हल्के से दबा दिया और उनकी ओर मुस्कुरा के देखा.
बेचारे…. चाह के भी….. अब मैंने और Bold हो के हाथ उनके पजामे में डाल के सुपाड़े को खोल दिया. पूरी तरह फूला और गरम था. उसे सहलाते-सहलाते मैंने अपने लंबे नाख़ून से उनके pi hole को छेड़ दिया. जोश में आके उन्होंने मेरे कबूतर(Boobs) कस के दबा दिए.
उनके चेहरे से उत्तेजना साफ़ झलक रही थी. वह उठ के बगल के कमरे में चले गए जो मेरी छोटी ननद का Study Room था. बड़ी मुश्किल से मेरी ननद और जेठानी ने अपनी मुस्कान दबायी.
“जाइये-जाइये भाभी, अभी आपका बुलावा आ रहा होगा.” शैतानी से मेरी छोटी ननद बोली.

(TBC)…



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मेरी शादी करवा दो


मेरी शादी करवा दो



दिल की कोमल उमंगों को भला कोई पार कर सका है, वो तो बस बढ़ती ही जाती हैं। मैंने भी घुमा फिरा कर माँ को अपनी बात बता दी थी कि मेरी अब अब शादी करवा दो।

माँ तो बस यह कह कर टाल देती… बड़ी बेशरम हो गई है… ऐसी भी क्या जल्दी है?

क्या कहती मैं भला, अब जिसकी चूत में खुजली चले उसे ही पता चलता है ना ! मेरी उमर भी अब चौबीस साल की हो रही थी। मैंने बी एड भी कर लिया था और अब मैंने एक प्राईवेट स्कूल में टीचर की नौकरी भी करती थी। मुझे जो वेतन मिलता था… उससे मेरी हाथ-खर्ची चलती थी और फिर शादी के लिये मैं कुछ ना कुछ खरीद ही ही लेती थी। एक धुंधली सी छवि को मैं अपने पति के रूप में देखा करती थी। पर ये धुंधली सी छवि किसकी थी।

पापा ने सामने का एक कमरा मुझे दे दिया था, जो कि उन्होने वास्तव में किराये के लिये बनाया था। उसका एक दरवाजा बाहर भी खुलता था। मेरी साईड की खिड़की मेरे पड़ोसी के कमरे की ओर खुलती थी। जहाँ मेरी सहेली रजनी और उसका पति विवेक रहते थे। शायद मेरे मन में उसके पति विवेक जैसा ही कोई लड़का छवि के रूप में आता था। शायद मेरे आस-पास वो एक ही लड़का था जो मुझे बार बार देखा करता था सो शायद वही मुझे अच्छा लगने लगा था।

कभी कभी मैं देर रात को अपने घर के बाहर का दरवाजा खोल कर बहुत देर तक कुर्सी पर बैठ कर ठण्डी हवा का आनन्द लिया करती थी। कभी कभी तो मैं अपनी शमीज के ऊपर से अनजाने में अपनी चूत को भी धीरे धीरे घिसने लगती थी, परिणाम स्खलन में ही होता था। फिर मैं दरवाजा बन्द करके सोने चली जाती थी। मुझे नहीं पता था कि विवेक अपने कमरे की लाईट बन्द करके ये सब देखा करता था। मेरी सहेली तो दस बजे ही सो जाती थी।

एक बार रात को जैसे ही सोने के लिये जा रही थी कि विवेक के कमरे की बत्ती जल उठी। मेरा ध्यान बरबस ही उस ओर चला गया। वो चड्डी के ऊपर से अपना लण्ड मसलता हुआ बाथरूम की ओर जा रहा था। मैं अपनी अधखुली खिड़की से चिपक कर खड़ी हो गई। बाथरूम से पहले ही उसने चड्डी में से अपना लण्ड बाहर निकाला और उसे हिलाने लगा। यह देख कर मेरे दिल में जैसे सांप लोट गया, मैंने अपनी चूत धीरे से दबा ली। फिर वो बाथरूम में चला गया। पेशाब करके वो बाहर निकला और उसने अपना लण्ड चड्डी से बाहर निकाला और उसे मुठ्ठ जैसा रगड़ा। फिर उसने जोर से अपने लण्ड को दबाया और चड्डी के अन्दर उसे डाल दिया। उसका खड़ा हुआ लण्ड बहुत मुश्किल से चड्डी में समाया था।

मेरे दिल में, दिमाग में उसके लण्ड की एक तस्वीर सी बैठ गई। मुझसे रहा नहीं गया और मैं धीरे से वहीं बैठ गई। मैंने हौले हौले से अपनी चूत को घिसना आरम्भ कर दिया… अपनी एक अंगुली चूत में घुसा भी दी… मेरी आँखें धीरे धीरे बन्द सी हो गई। कुछ देर तक तो मैं मुठ्ठ मारती रही और फिर मेरी चूत से पानी छूट गया। मेरा स्खलन हो गया था। मैं वहीं नीचे जमीन पर आराम से बैठ गई और दोनो घुटनों के मध्य अपना सर रख दिया। कुछ देर बाद मैं उठी और अपने बिस्तर पर आकर सो गई।

सवेरे मैं तैयार हो कर स्कूल के लिये निकली ही थी कि विवेक घर के बाहर अपनी बाईक पर कहीं जाने की तैयारी कर रहा था।

“कामिनी जी ! स्कूल जा रही हैं?”

“जी हाँ ! पर मैं चली जाऊँगी, बस आने वाली है…”

“बस तो रोज ही आती है, आज चलो मैं ही छोड़ आऊँ… प्लीज चलिये ना…”

मेरे दिल में एक हूक सी उठ गई… भला उसे कैसे मना करती? मुस्करा कर मैंने उसे देखा- देखिये, रास्ते में ना छोड़ देना… मजिल तक पहुँचाइएगा !

मैंने द्विअर्थी डायलॉग बोला… मेरे दिल में एक गुदगुदी सी उठी। मैं उसकी बाईक के पास आ गई।

“ये तो अब आप पर है… कहाँ तक साथ देती हैं!”

“लाईन मार रहे हो?”

वो हंस दिया, मुझे भी हंसी आ गई। मैं उछल कर पीछे बैठ गई। उसने बाईक स्टार्ट की और चल पड़ा। रास्ते में उसने बहुत सी शरारतें की। वो बार बार गाड़ी का ब्रेक मार कर मुझे उससे टकराने का मौका देता। मेरे सीने के उभार उसके कठोर पीठ से टकरा जाते। मुझे रोमांच सा हो उठता था। अगली बार जब उसन ब्रेक लगाया तो मैंने अपने सीने के दोनों उभार उसकी पीठ से चिपका दिये।

(TBC)…



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तीन दिन मधु के साथ सुहागरात


मेरा नाम अरुण है। मेरे दफ़्तर में एक मधु नाम की लड़की थी। वो सच में बला की खूबसूरत थी। जब से वो मेरे दफ़्तर में काम करने के लिए आई, मैं तो बस उसको ही देखता रहता था। उसकी फ़ीगर कमाल की थी और लम्बे लम्बे बाल थे। उसके बड़े बड़े बूब्स देख कर तो मैं पागल ही हो जाता था और हर वक्त सोचता रहता था कि कब मैं इन बूब्स को चूस पाऊंगा। मैं अपने केबिन से छिप छिप कर उसको देखता रहता और उसके साथ सेक्स करने के सपने देखता रहता था। उसने भी मेरी यह बात पकड़ ली थी मैं उसको देखता रहता हूँ लेकिन उसने कभी कुछ नहीं कहा। शायद वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित थी।

लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे सारे सपने सच हो गए।

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हुआ यूं कि एक दिन मधु मेरे केबिन में आई और उसने मुझे कहा कि उसे वेतन के अलावा कुछ और पैसों की जरूरत है और वो ये पैसे धीरे धीरे वापिस कर देगी। लेकिन मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता था इसलिए मैंने उसे कहा कि अगर वो मुझ पर विश्वास करती है तो मैं उससे अकेले में मिलना चाह्ता हूं।

वो मान गई। मैंने उसे घर आने को कहा और कहा कि पैसे मैं घर पर ही दे दूंगा। अगले तीन दिन के लिए दफ़्तर बंद था और मेरे घर वाले भी बाहर गए हुए थे इसलिए मैंने उसे अगले दिन सुबह घर पर बुला लिया।

अगले दिन जब वो घर आई तो उसने जीन्स और शर्ट पहनी हुई थी और बाल खुले हुए थे। उस वक्त वो कयामत लग रही थी। उसे देख कर मेरा लण्ड एक दम से खड़ा हो गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को सम्भाला और उसे अपने बेडरूम में ले गया। मैं बस तरीका सोच रहा था कि किस तरह से मैं उसको चोदूं ! तब मैंने उसको अपने पास बुलाया और उसके हाथ अपने हाथों में ले कर कहा,” मधु, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ.”

उसने यह सुन कर कहा कि वो मुझ से प्यार करती है. यह सुन कर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने उसे अपनी बाँहों में जकड लिया। उसके बूब्स मेरी छाती से छू रहे थे और मैं और ज़्यादा पागल हो रहा था मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों से सहलाने लगा. अब मैं उसको अपने और करीब ले कर आया और अपने होंठो को उसके होंठों पर रख कर चूमने लगा। मैं बड़े प्यार से उसके होंठों को चूम रहा था और वो भी इसका मजा ले रही थी।

काफ़ी देर तक चूमने के बाद मैं उसके पूरे चेहरे पर चूमने लगा उसके गालों पर, उसकी गर्दन पर। फिर मैंने उसकी शर्ट का पहला बटन खोला वो एक दम से बोली यह क्या कर रहे हो, मैंने कहा हम एक दूसरे से प्यार करते हैं इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है, यह बोलते बोलते मैंने उसकी शर्ट के तीन चार बटन खोल दिए। अब मुझे उसकी ब्रा नज़र आ रही थी और ब्रा में बंद उसके बड़े बड़े बूब्स बाहर निकलने को तड़प रहे थे।

मैंने उसकी शर्ट उतार दी और वो ब्रा में तो कयामत लग रही थी। तब उसका ध्यान मेरे लंड पर गया जो बहुत खड़ा हो चुका था और उसे बार बार चुभ भी रहा था।

मैंने कहा- इसे देखना चाहोगी?

तब उसने मेरी पैंट का बटन खोल कर मेरी पैंट और मेरा अंडरवियर भी उतार दिया और मेरे लंड को ले कर जोर जोर से मसलने लगी। तब वो मेरा लंड अपने मुंह में ले कर उसे चूसने लगी। उसके चूसने से मेरा लंड और भी बड़ा हो गया। उसे मेरे लंड को चूसने में और उसके साथ खेलने में बड़ा मज़ा आ रहा था लेकिन मुझ से कंट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए मैंने उसे उठा कर उसकी पैंट भी उतार दी। उसने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई थी। वोह सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी, मैं अपने पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था और मैं उसको पागलों की तरह चूमने लगा।

मैंने उसको उल्टा किया और अपने मुंह से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। अब वो भी तड़प रही थी चुदवाने के लिए। उसके बूब्स को देख कर मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से झटके खाने लगा तब सबसे पहले मैंने उसके निप्पल को चूपा। उसके निप्पल भी बड़े सखत हो रखे थे और मुझे भी उन्हें चूपने का बड़ा मज़ा आ रहा था।

वो भी बहुत तड़प रही थी और बार बार बोल रही थी- और ज़ोर से, और ज़ोर से.

फिर मैं उसके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और वो चीखने लगी फिर मैंने उसकी पैंटी को अपने दांतों से खींच कर उतार दिया। मेरे इस तरह करने से वो और ज़्यादा तड़पने लगी। तब मैंने उसकी चूत को देखा, उसकी चूत पर बाल नहीं थे और उसकी चूत बहुत मस्त लग रही थी। उसकी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया और मैं उसकी चूत को चाटने लगा। मधु ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी आ आ आ आ ओ ऊ ऊ ओ ओ करने लगी

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थोडी देर तक उसकी चूत चाटने के बाद मैंने देखा की वो बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन मैं उसको और गरम करना चाहता था इसलिए अब मैं अपने लंड को उसके पूरे बदन पर घुमाने लगा, पहले उसके चेहरे पर अपने लंड को लगाया फिर उसकी गर्दन पर, फिर उसके बूब्स पर, उसके निप्पल पर, उसके बूब्स के बीच में अच्छी तरह मैं अपने लंड को लगा रहा था। मेरे लंड से जो पानी निकल रहा था वो भी उसके पूरे बदन पर लग रहा था जिससे वो और ज़्यादा गरम हो रही थी। मैंने अपने लंड को उसके बूब्स के बीच में अच्छी तरह दबा दिया वो भी मेरे लंड को अपने बूब्स में रख कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी।

तब उसने मुझसे कहा- अरुण, अब और सहा नहीं जा रहा इस लंड को मेरी चूत में डाल कर मेरी प्यास शांत कर दो।

मैं नीचे लेट गया और मधु मेरे ऊपर बैठ गई उसने मेरा लंड पकड़ा और पहले अपनी चूत पर घिसने लगी फिर मैंने एक झटके से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया मेरे लंड डालते ही मधु ज़ोर से चीखी। मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर था और मधु ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी। वो ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी और मैं कभी उसके बूब्स को दबा रहा था और कभी उसके निप्पल को चूप रहा था। थोड़ा देर बाद हम दोनों झड़ चुके थे।

फिर थोडी देर बाद हम दोनों बाथरूम में गए और इक्कठे नहाते वक्त एक बार फिर सेक्स किया। वो तीन दिन मधु मेरे साथ ही रही और हमने उन तीन दिनों में कई बार सेक्स किया, कभी बाथरूम में, कभी किचन में, कभी सीढियों में, कभी डाइनिंग टेबल पर और कभी ज़मीन पर। वो तीन दिन मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन थे।

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Sali nahi to sale ki biwi


Main 30 saal ka naujwan hon,meree shadee aaj se 2 saal pehlee howe thee, suhag rat ko mera 9″ ka lund dekh kar meree biwi buhat daar gayee thee aur jab main usee chodna shuroo kiya too woh buri tarah se chillane lagi thee, use itna dard ho raha tha k usne mera land aur ander lenee see saf mana kar diya, majbooran main ne apna land us ki chot se bahar nikal lya,mere land ka siraf top hi ander ja saka tha lekin us koo buhat dard hone laga tha,khair is tarah pura ek week guzar gaya, lekin main usee puree tarah see na chod saka,mujhe sex buhat zayada tha, but mera sex puree tarah se satisfied nahi ho saka tha, yeh baat us nee apne makee (behan aur bhabhi) ko batayee k main ne abhi tak apne husband se chudai nahi karwa sakee hoon, because un ka land buhat bada aur mota hai, mujhe buhat dard hota hai, main kiya karon?

Uski behan aur bhabhi ne samjaya k jawan ar handsome admi ka land too hota hi aisa hai, too too lucky hai zoo tujhe itna bada land mila hai, kisi bhi tarah se us ka pura land apni chot main lee loo,bada maza aayega,lekn meree biwi phir bhi buhat daar rahi thee, yeh sab sunkar us ke bhai ki biwi us ki bhabhi ko buhat maza aa raha tha,aur woh kuch soch main pad gayee thee, (yeh baat mujhee us ki bhabhi ne us wakat batayee jab main ne us koo chodna shuroo kiya tha)aur woh koi palan banakar mujh see milna chahtee thee, main sex pura na hone ke karan udas udas rehta tha, ek din jab hum donoo us ke bhai ke gher gayee howee thee dawat main tab bhabhi ne mujhee akelee main kaha k woh mujh see kuch baat karna chahtee hai,main ne apna cell umber un koo de diya,ek din bhabhi ne mujhee call kee aur kaha k kiya hall hain, main ne kaha buhat bura hai,kehnee lagi mujhe sab pata hai tum abhi tak apna sex pura nahi ker sakee hoo.

Main ne jawab diya haan bhabhi mujhe bohat takleef hoo rahi hai,abhi tak main satisfied nahi hoo saka hon,is par bhabhi (jin ka naam rosy hai) ne kaha tum fikar mat karoo main koi arrange kertee hon k tumhara sex pura ho sakee, main ne pucha, kaisee? Rosy ne kaha,main koi arrengment ker kee dobara tum ko contact karongee, aur hum kahin mil kar is baree main baat karengee, main ne kaha, theek hai,main wait karonga,teen char din ke baad rosy ke caal aayee, us ne kaha main kal apni maan ke gher jawongee,woh log kuch dino ke liyee kahin ja rahee hain,gher main siraf main hi hongee,tum kal 5 pm ko aa jana, main khush ho gaya aur kaha main wakat par puhanch jawonga,dosree din main thek wakat par rosy ki maan ke gher chala gaya, woh her main akelee thee, us ne mujhe wellcome kiya aur gher ke ander lee gayee, rosy meree biwi ki age ki hi thee.lekin meree biwi se zayad khubsurat aur sexy thee, man aur woh andar ja ker bed par baith gayee,us ne mujhee kuch jalpan ka pucha main ne kaha, abhi nahi bad main dekhengee, phir woh meree sath baith gayee ar pcha k kiya baat hai, tum apni biwi se satisfied kiyon nahi hotee hoo.

Main ne kaha aap ko too pata hai na,woh abhi tak meree sath sex nahi kar saki hai, mera size bada hai aur mota bhi hai,usee buhat dard hota tha, isi liyee aaj tak us nee mujhee satisfied nahi kiya hai, is par rosy ne kaha, kiya koi aur tum ko satisfied karna chahee too kiya tum man jawoogee? Main ne kaha koi se aap ka kiya matlab hai? Us ne kaha chaloo aisa samjhoo agar main tum ko satisfied kar don tab? Main yeh sun kar ashcharyee main pad gaya, woh muskaratee howee boli, main tumhara wh dekhna chahtee hon,jisee tumharee biwi abhi tak nahi lee saki hai,bcause meree pati ka buhat chota hai aur main khud bhi abhi tak sex ka sahee maza nahi liya hai, kiya tum apna aur mera sex problem solve nahi kerna chahoo gee? Main ne kaha agar tum chahtee hoo k hum dono ka yeh problem solve hoo jayee too mujhee koi objection nahi hai, woh khush hoo gayee aur mera ek hath pakad kar usne apnee boob par rakh diya aur meree kafi kareeb main aa gayee.

Main us kee boob ko dabanee laga aur us kee honton par apne honth rakh kee usee chusnee laga,woh ek dam see exite ho gayee thee.us ne apna ek hath meree paint ki zip khol kar meree land koo apne hatha main le liya aur dabanee lagee, ufffff kiya maza aa raha tha hum donoo koo,us kee boobs buhat sakhat thee aur nipples gulabee coulur ke thee, main ne dosree hath see us ki chot par apna hath pherna shuroo kar diya, woh siskaree kenee lagee,dostoo, is ke baad kiya howa woh main apni next story main aap ko details main batawonga, hope u all enjoy this story please wait and watch thanks!

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मेरी शादी करवा दो भाग २


मेरी शादी करवा दो भाग २



उफ़्फ़्फ़ ! कितना आनन्द आया था। मैंने तो स्कूल पहुँचते-पहुँचते दो तीन बार अपनी चूचियाँ उसकी पीठ से रगड़ दी थी।

“दोपहर को आपको लेने आऊँ क्या?”

“अरे नहीं… सब देखेंगे तो बातें बनायेंगे… मैं बस से आ जाऊंगी।”

“तो कल सवेरे…?”

“तुम्हारे पास समय होगा?”

वो मुस्कराया और बोला- मैं सवेरे दूध लेने बूथ पर जाता हूँ… आपका इन्तज़ार कर लूंगा…

मैं उस पर तिरछी नजर डाल कर मुस्कुराई… मुझे आशा थी कि वो जरूर मेरी इस तिरछी मुस्कान से घायल हो गया होगा। मुझे लगा कि बैठे बिठाये जनाब फ़ंसते जा रहे हैं…

फिर सावधान ! मैं ही सावधान हो गई… मुझे बदनाम नहीं होना था। सलीके से काम करना था।

दूसरे दिन मैंने सावधानी से घर से बाहर निकलते ही एक कपड़ा सर पर डाल कर अन्य लड़कियों की भांति उससे चेहरा लपेट लिया… लपेट क्या लिया बल्कि कहिये कि छिपा लिया था।वो घर के बाहर बाईक पर मेरा इन्तजार कर रहा था। मैं उसके पीछे जाकर बैठ गई और अपनी दोनों चूचियाँ सावधानी से उसकी पीठ पर जानबूझ कर दबा दी। मुझे स्वयं भी बेशर्मी से ऐसा करते करते हुये जैसे बिजली का सा झटका लगा। विवेक एकदम विचलित सा हो गया।

“क्या हुआ? चलिये ना !”

मेरी गुदाज छातियों का नरम स्पर्श उसे अन्दर तक कंपकंपा गया था। उसकी सिरहन मुझे अपने तक महसूस हुई थी। उसने गाड़ी स्टार्ट की और आगे बढ़ चला। मैंने धीरे धीरे अपनी छाती उसकी पीठ से रगड़ना शुरू कर दी… क्या करूँ… दिल पागल सा जो हो रहा था। वो रास्ते भर बेचैन रहा… उसका लण्ड बेहद सख्त हो चुका था। मैंने अपना हाथ उसकी कमर से लपेट लिया था। फिर धीरे से उसके लण्ड को भी मैंने दबा सा दिया था। इतना कड़क लण्ड, मुझे लगा कि उसे मैं जोर से दबा कर उसका रस ही निकाल दूँ…

मेरा स्कूल कब आ गया मुझे पता ही ना चला।

“कामिनी जी, आपका स्कूल आ गया…”

मैं चौंक सी गई- ओह्ह ! सॉरी विवेक जी… आपका बहुत बहुत धन्यवाद…!

“सॉरी किस बात का… कामिनी जी रात को आप मिल सकेंगी…?”

“जी रात को… क्यों… मेरा मतलब है… कोई काम है क्या?”

“जी हाँ… मगर आप चाहें तो… आपकी आज्ञा चाहिये बस…!”

“कोई देख लेगा तो…? देखिये प्लीज किसी को पता ना चले…”
‘रजनी तो आज अपनी मां के घर जा रही है… घर पर तो वो नहीं है।” यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

“जी ! मैं क्या कहूँ? आपकी मरजी !”

उसकी बातों में मुझे बहुत कुछ महसूस हो रहा था। मेरी सांस फ़ूल गई थी। मैं अपने आप को सम्हालते हुये स्कूल की तरफ़ बढ़ गई। मैं बार बार मुड़ कर उसे देख रही थी। वो एक टक दूर खड़ा मुझे मुस्करा कर देख रहा था।

रात के करीब ग्यारह बज रहे थे। टीवी पर रात का एक क्राईम सीरियल देख कर मैं ठण्डी हवा में कुर्सी लगा कर बैठ गई थी। बैठ क्या गई थी… आज तो मैं विवेक का इन्तज़ार कर रही थी। दिल में चोर था इसलिये मैं बार बार अपने घर के दरवाजे की ओर देख रही थी। जबकि मेरे मम्मी पापा कब के सो चुके थे। मेरे दिल की बेताबी बढ़ने लगी थी। दिल की धड़कने भी जैसे धक धक कर गले को आने लगी थी।

उफ़्फ़्फ़ ! मैंने यह क्या कर दिया… उसे मना कर दिया होता… अचानक मुझे घबराहट सी होने लगी थी। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिये था। कितनी बेवकूफ़ी लग रही थी मुझे। मैं जल्दी से उठी और अपना दरवाजा बन्द कर दिया। मेरी सांसें जोर जोर से चलने लगी थी। मैंने जल्दी से बिस्तर का आसरा लिया और लेट कर दुबक कर अपने आप को शांत करने लगी।

उफ़्फ़ ! कितनी बेवकूफ़ थी मैं जो उसे बुला लिया… । तभी धीरे से खटखट हुई… मेरा दिल एक बार फिर उछल कर जैसे हलक में आ गया। अब क्या करूँ?

“कामिनी जी… सो गई क्या?”

मुझसे रहा नहीं गया… मैं बिस्तर से धीरे से उठी और दरवाजे की ओर बढ़ चली। दरवाजे की चिटकनी खोलने के लिये जैसे ही मैंने हाथ बढ़ाया, फिर से आवाज आई- कामिनी जी, मैं विवेक…

“श्स्स्स्स्स… आ तो रही हूँ…”

मैंने धड़कते हुये दिल से दरवाजे की चिटकनी खोली और धीरे से उसे खोल दिया। विवेक जल्दी से अन्दर आ गया, दरवाजा बन्द दिया। मैं अन्धेरे में आँखें फ़ाड़े उसे एकटक देख रही थी। उसने अपनी बाहें खोल दी… मैं आगे बढ़ी और ना चाहते हुये भी उसमें समा गई। उसने प्यार से मेरे बालों को सहलाया। मुझे एक मदहोशी सी आने लगी। उसकी बाहों में एक जादू था। किसी मर्द के सामीप्य का एक अनोखा मर्दाना सुख… कैसा अलग सा होता है… स्वर्ग जैसा… ऐसा सुख जो एक मर्द ही दे सकता है। उसका सुडौल शरीर… कसा हुआ… मांसल… एक जवानी की अनोखी खुशबू… ।

(TBC)…



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निशा से चुदाई का रिश्ता


मेरि एक फ़रिएनद थि उसका नाम था निशा।हुम दोनो एक हि इनसतितुते पे computer course कर रहे थे। वोह थि शरमिलि सि थि।हुमेशा मुझसे दरति थि,एक सिन मेन उसके घर गया वोह अकेलि थि, उसके मुम्मि पपा बहर गये हुवे थे।

उसने मुझसे पुचा कया पियोगे सोफ़त दरिनक या कुच होत।मेन ने कहा मुझे तु होत हि पसनद है तुम मुझे सूफ़े पिला दो।

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वोह कोफ़्फ़ी बनने चलि गयि। मेन तव देख रहा था।मेन ने सोचा सद पलयेर ओन करता हून उसमेन आलरेअदी एक सद थि। मेन ने पलय किया तु उसमेन बलुए फ़लिम थि।

मेन ने उस्से जलदि से बनद कर दिया।मेन ने सोफ़्फ़े पि और चला आया घर। मेन ने सोचा निशा तु मुझसे दरति है सेक्स के नाम से बात हि नहि करना पसनद करति तु फिर ये सब कया है।कुच दिन बाद इनसतितुए पे उसने मुझे घर आने को कहा ।

मेन उसके घर गया उसदिन भि वहन पर कोइ नहि था बुस वोह अकेलि थि। मेन ने उस्से सोफ़्फ़े बनने को कहा ।वोह अनदर चलि गयि ।मेन भि उसके पिचे चला गया और उसके पिचे चिपका गया ।मेरा लुनद उसकि गनद से चिपका दिया ।वोह घबरने लगि और अग्गे होने लगि मेन फिर उस्से चिपक ने लगा वोह केहने लगि ये कया कर रहे हू।मेन ने उसको पकद लिया और उसके लिपस पे किस्स करने लगा ,उसने मुझे धक्का दे दिया और कहा ये कया है महेश ये कया कर रहे हू तुम ।उसने मुझसे बहर जाकर बेथ ने को कहा। मेन बहर आ गया और सोफ़्फ़े पिने लगा।

मेन ने उस्से पुचा कि तुम मुझसे इतना कयोन दरति हू ।बलुए फ़लिम कि सद देखति हू।वोह केहने लगि कून सि सद , मेन ने कहा बलुए फ़लिम वोह बोलि ये कून सि होति है मेन ने कहा कि कभि देखि नहि कया तु बोलि नहि ,मेन ने कहा अचा थिक है। और सोफ़्फ़ी पिने लग गया ।कुच देर बाद वोह बोलि तुमने कभि देखि है बलुए फ़लिम मेन ने कहा हान देखि है तु बलि कया होता है उसमेन मेन कहा कुच नहि जैसे दुसरि मोविए होति है वैसि होति है तु मुझसे पुचने लगि कया होता है बतओ ना बहुत जिद्द कर ने लगि मेन ने कहा एक शरत है वोह बोलि कया तु मेन ने कहा मेन तुहैन करके बतता हून कया होता है बलुए फ़लिम मेन तु केहने लगि ओक करो।मेन समझ गया कि ये भि चहति है मुझसे कुच।

फिर मेन धिरे धिरे उसके पस्स आने लगा और फिर उसका हाथ पकद लिया उसने मुझसे कुच नहि कहा धिरे धिरे मेन उसके बूबस दबने लगा उसके बूनस कफ़ि बदे और कदक थे । मुझे भि कफ़ि मजा आ रहा था और उस्से भि ।फिर मेन उसके लिपस पे किस्स करने लगा उसमेन जोश आ गया था।वोह मेरे शिरत के बुत्तोन खोलने लगि लेकिन उस्से बुत्तोन नहि खुल रहे थे तु उसने मेरि शिरत को फ़ाद दिया ।मेन भि पुरे जोश मेन था मेन ने उसका कुरता उअतरा फिर धिरे से सलवा खोलि फिर उसकि बरा को खोला और उसके बूबस को चुसने लगा वोह

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आआआआआआआआ।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह।आआआआआआआआअ।।।।।।।।।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह।।।।।।।।।।।।।।करने लगि ।फिर मेन ने उसकि चद्दि उतार दि ।वोह केहने लगि इतने देर पेनत खोलने मेन लऊ मेन खोल देति हून। उसने मेरि पेनत का हूक खोला और फिर ज़िप को खिलने लगि मेरा लुनद खला था ।वोह मेरे लुनद को सेहलने लगि और फिर उसने अपने मुह मेन ले लिया और चुस्सने लगि । मुझे कफ़ि मज़ा आ रहा था।कुच देर बाद केह ने लगि आब दलो भि और कितना चूसवऊगे मेन ने लुनद उसकि चुत मेन दला मगर उसकि पुस्सी इतनि तिघत थि कि मेरा लुनद अनदर नहि जा रहा था तु वोह बोलि एक काम करो तुम अपने फ़िनगेर को मेरि पुस्सी मेन दलो। मेन ने वहि किया अपनि फ़िनगेर को उसकि पुस्सी मेन दल दिया।

और अनदर बहर करने लगा कुच देर बाद बोलि आब दलो अपना लुनद तु मेन ने दला उसमेन अपना लौनद मगर फिर भि नहि जा रहा था । मेन ने कोस्सहिश कि और जैसे तैसे अपना लुनद उसकि पुस्सी मेन दला तु वोह जूर से चिल्ला उथि आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआअ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह। मेन दर गया मेन ने कहा चिल्ला कयोन रहि हो ऐसा तु होगा हि ना तु बोलि नहि महेश धिरे धिरे दलो मेन ने कहा वहि कर रहा हून। फिर मेन ने लुनद दला और जूर जूर से शोत मरने लगा।वोह चिल्ला ने लगि आआआआआआआआआआआअ।।।।।।।।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऔऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊउ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।स्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्स।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह मेन फिर उसके लिपस पे किस्स करने लगा तकि उसकि आवज़ ना निकले और मेन जूर जूर से शोत मरने लगा।10 12 बार शोत मरने के बाद मेरा मालबहर निकल गया । और मेन उस्से चिपक कर सो गया वोह केहने लगि महेश कया ऐसा होता है बलुए फ़लिम मेन तु मेन ने कहा हान ऐसा होता है तु बोलि आब हुम रोज करेनगे मेन नी उस्से कहा कि जब भि कोइ घर पर नहि हू मुझे बुला लिया करो तु केहने लगि थिक है लेकिन तुम ये किसि को नहि बतना कि हुमने कया किया मेन ने कहा नहि बतऊनगा और घर चला आया और फिर हुमरा ये सिलसिला चलता रहा फिर उसकि शदि हो गयि और वोह मुझसे जुदा हो गयि।

ओक फ़रिएनदस आप को मेरि कहनि केसि लगि मुझे मेरे yahoo id XXXXXXXXX पे मैल करेन या मुझसे चत करके मुझे बतयैन कि आप को मेरि कहनि केसि लगि ओक फ़रिएनदस मेन फिर से जलदि से एक कहनि लेकेर आऊनगा।

बयीईईईईईईईईई

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मेरी शादी करवा दो भाग ३


मेरी शादी करवा दो भाग ३



“विवेक जी ! हमें ऐसा नहीं करना चाहिये… आप तो शादी…”

‘कामिनी जी… सब भूल जाईये… मेरे शादीशुदा होने से क्या फ़र्क पड़ता है…?”

“रजनी… फिर उसका क्या होगा?”

“कुछ नहीं होगा… बस तुम्हारा प्यार और आ गया है !”

उसने अपना सर झुकाया और मेरे थरथराते हुए लबों को अपने अधरों के मध्य दबा लिया। ओह्ह मां ! यह कैसा सुख !!! उसकी जीभ मेरे मुख में इधर उधर शरारत करने लगी थी… मैं मदहोश होती चली गई। तभी उसके कठोर हथेलियों का कठोर दबाव मेरे नरम गुदाज स्तनों पर होने लगा।

“नहीं… यह नहीं… आह्ह्ह्ह्ह… बस करो… विवेक… उह्ह्ह्ह”

“बहुत कठोर हैं तुम्हारे म…”

मैं इस नाजुक से हमले से सिहर सी गई। एक तेज गुदगुदी सी हुई। तभी उसकी अंगुली और अंगूठे के बीच में मेरे निप्पल मसल से गये… मेरी चूत में एक भयानक सी खुजली उठने लगी। शायद चूत में से पानी रिसने लगा था। मैंने नशे की सी हालत में विवेक को झटक सा दिया… परिणाम स्वरूप वो मुझसे अलग हो गया।
“विवेक प्लीज… मुझे बेहाल मत करो… आओ… बिस्तर पर लेटते हैं… फिर दिल की बातें करते हैं !!”

“क्यूँ आनन्द नहीं आया क्या?”

“प्लीज… ऐसे नहीं… बस बातें करो… अच्छी अच्छी… प्यार भरी… बस ! ये छुआछूई मत करो…”

मैंने उसे कुछ भी करने से रोक दिया… बस उसे लेकर बिस्तर पर लेट गई। उसे चित लेटा कर उसकी छाती पर मैंने अपना सर रख दिया। और उसके बदन को सहलाने लगी… दबाने लगी।

“विवेक… तुम मुझे प्यार करते हो?”

“नहीं… बिलकुल नहीं… तुम मुझे अच्छी लगती हो बस…”

“कितने कठोर हो… फिर रात को यहाँ क्यों आये हो?”

“तुममें एक कशिश है… तुम्हारा शरीर बहुत सेक्सी है… कुछ करने को मन करता है…”

“तुम भी मुझे बहुत सेक्सी लगते हो विवेक… मैंने आज तक किसी मर्द के साथ दोस्ती नहीं की है… तुम पहले मर्द हो… तुम बहुत अच्छे लगते हो…”

उसके पेट पर हाथ फ़ेरते हुये मेरा हाथ उसके लण्ड से टकरा गया।

हाय राम ! इतना कड़क… इतना बड़ा… देखा था उससे भी बड़ा?

मैंने जल्दी से अपना हाथ हटा दिया और दूसरी तरफ़ करवट पर लेट गई। विवेक ने पीछे से अपने हाथ का घेरा मेरी कमर पर डाल दिया और मेरी पीठ को अपने पेट से सटा लिया।

“विवेक, तुमने अन्दर कुछ नहीं पहना है क्या?”

“तो तुमने कौन सा पहन रखा है?”

मेरे कूल्हों की गोलाइयाँ उसकी जांघों से चिपक सी गई थी। मेरे चूतड़ों के मध्य दरार में उसका लण्ड सट गया था।

“तुम साथ हो कामिनी… कितना मधुर पल हैं ये…”

“तुम्हारे अंग कितने कठोर है विवेक… कितनी कड़ाई से अपनी उपस्थिति दर्शा रहे हैं। मुझे तो नशा सा आ रहा है।”

उसका लण्ड अब और कठोर हो कर मेरी दरार को चीरने की कोशिश कर रहा था। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था। मैंने अपना हाथ बढ़ा कर उसके सुडौल कूल्हों पर रख दिया और अपनी ओर धीरे से खींचने लगी। उफ़्फ़ ! राम रे… उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद पर गुद्गुदी करने लगा। पता नहीं उसने कब अपना पायजामा नीचे सरका दिया था। मेरी काली शमीज उसने धीरे से ऊपर कर दी थी। मुझे लगा मेरी गाण्ड के छेद पर उसका नंगा लण्ड का सुपारा रगड़ खा रहा था।
“ओह्ह नहीं ! ये सब कब हो गया?’

उसका दूसरा हाथ मेरी छाती से लिपटा हुआ था। मैं कठोरता के साथ उसके बदन से चिपकी हुई थी।

ओह्ह्ह… ये क्या… मुझे लगा उसका सुपारा मेरी गाण्ड के छेद को चौड़ा कर रहा है… मुझे एक तरावट सी आई…

“विवेक… तुम क्या कर रहे हो?”

“कुछ नहीं… बस नीचे से वो ही जोर लगा रहा है… उसने अपना जोड़ीदार ढूंढ लिया है…”

“उह्ह्ह्ह… बहुत तेज गुदगुदी उठ रही है…”

तभी मुझे लगा कि मेरी गाण्ड का छेद फ़ैलता ही जा रहा है… उसका लण्ड अन्दर प्रवेश की अनुमति बस चाहता ही है… मैंने मस्ती में आकर अपनी गाण्ड का छेद ढीला छोड़ दिया… मां री… उसका लण्ड तो फ़क से घुस गया।

“इह्ह्ह्ह… मर गई मैं तो… उस्स्स्स्स्स…।”

मुझे एक सहनीय… आनन्द सा उभर आया… विवेक का जो हाथ मेरी छाती से कसा हुआ था वो एकाएक मेरी चूचियों पर आ टिका। मैंने एक अंगड़ाई सी ली और अपने शरीर का भार विवेक पर डाल दिया…

“ये क्या कर डाला मेरे जानू…?”

उसका लण्ड और मेरी गाण्ड में अन्दर सरक आया।

“ये… उह्ह्ह्ह… जालिम… बहुत कड़ाई से पेश आ रहा है… कितनी गुदगुदी चल रही है…”

मेरी चूचियाँ वो मसलने लगा… चूत में बला की तरावट आ गई थी… विवेक ने मेरे गालों को चूम लिया… मेरी चूत को वो गुदगुदाने लगा… वो लण्ड भीतर गहराई में उतारता भी जा रहा था और मेरी चूत को जोर जोर से सहला भी रहा था। दाने पर उसकी अंगुलियाँ गोल गोल घूम कर मुझे विशेष मस्ती दे रही थी। बहुत आराम के साथ वो मेरी गाण्ड मार रहा था… मेरा अंग अंग उसके हाथों से मसला जा रहा था। मुझे अब लग रहा था कि मुझे चूत में उसका मुस्टण्डा लण्ड अन्दर तक चाहिये। पर कैसे कहती…

(TBC)…



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मेरी शादी करवा दो भाग ४


मेरी शादी करवा दो भाग ४



मैं बल खाकर सीधी हो गई। उसका लण्ड गाण्ड से बाहर निकल आया।

“उफ़्फ़ विवेक… तुम कितने अच्छे हो… जान निकाल दी मेरी…”

विवेक ने धीरे से अपनी एक टांग मेरी कमर पर रख दी और जैसे उसे कस कर मेरी कमर से जकड़ लिया। फिर वो सरक कर मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी चूचियाँ कठोरता से थाम ली। तभी मुझे अपनी चूत पर उसका सख्त लण्ड महसूस हुआ।

“ओह्ह… मेरे जानू… जरा प्यार से…”

उसका सुपारा मेरी चूत में घुसने कोशिश करने लगा। विवेक के चेहरे पर कठोरता सी झलक आई। उसने अपने दोनों हाथों पर अपना वजन उठा लिया और कमर से थोड़ा सा ऊपर उठ गया। उसका लण्ड लोहे की छड़ जैसा तना हुआ चूत के ऊपर धार पर रखा हुआ था।

उसने जोर लगाया… वो डण्डा चूत में घुसता चला गया…। कितना गरम लण्ड था… तभी मुझे तेज जलन सी हुई…
“अरे जरा धीरे से… लग रही है…”

उसने लण्ड जरा सा पीछे खींचा और आहिस्ते से वापिस अन्दर घुसाने लगा…

“उफ़्फ़… क्या फ़ाड़ डालोगे… दुखता है ना।”

“बस हो गया रानी…”

वो जोर लगाता ही चला गया… मेरी तो दर्द के मारे आँखें ही फ़टने लगी…

“बस थोड़ा सा ओर… बस हो गया…”

मेरे मुख पर हाथ रख कर उसने अन्तत: एक जोर से शॉट मार ही दिया। मेरी चीख मुख में ही दब सी गई… विवेक अब धीरे से मुझ पर लेट गया।

“चीख निकल जाती तो… मर ही जाते… ! और वो परदा… गया काम से… !”

“जब जानती हो तो अब कोई तकलीफ़ नहीं है…”

मेरा दर्द शनै: शनै: कम होता जा रहा था। वो अपना लण्ड अब धीरे धीरे से चलाने लग गया था। मुझे भी अब भीतर से गुदगुदी उठने लगी थी। उसने एक बार लण्ड बाहर निकाला और गिलास के पानी से रुमाल भिगोया और पूरी चूत का खून साफ़ कर दिया। उसने जब फिर से लण्ड घुसेड़ा तो एक मीठी सी गुदगुदी उठने लगी। मेरी चूत तो अपने आप ही चलने लगी… तज तेज… और तेज… फिर लय में एक समां बन्ध गया। उसने खूब चोदा मुझे… एकाएक उसकी तेजी बढ़ सी गई। उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और जोर की एक पिचकारी छोड़ दी… उसने मेरा चेहरा वीर्य से भर दिया… मेरी चूचियाँ गीली हो गई चिपचिपी सी हो गई… फिर बचा-खुचा वीर्य उसने मेरी चूत पर गिरा कर उसे मेरी चूत पर लिपटा दिया।

“छी: ! यह क्या कर रहे हो… घिन नहीं आती तुम्हें?”

“यही तो झड़ने का मजा है…। नहा लेना इसमें ! क्या है?”

“अरे मैं तो जाने कितनी बार झड़ गई… बस करो अब…”

मैंने पहली बार यह सब किया था सो मुझे ये सब करने के बाद नींद आ गई। फिर अचानक रात को ना जाने कब विवेक मुझे फिर से चोद रहा था। पहले तो मुझे दर्द सा हुआ… फिर मुझे भी तेज चुदने की लग गई। उस रात हमने तीन बार चुदाई की। सवेरे होते होते वो चला गया था। मैंने दूसरी चादर बदल ली थी। फिर तो मुझे ऐसी नींद आई कि स्कूल के समय में भी मेरी नींद नहीं खुली। मम्मी पापा ने जानकर नहीं जगाया। उस दिन मुझे छुट्टी लेनी पड़ी।

रात होते होते मन फिर से जलने लगा… विवेक का लण्ड मुझे नजर आने लगा… चूत में, चूचियों में दर्द तो था ही… पर चूत की ज्वाला कैसे रोकती, वो तो भड़कने लगी थी। रात आई… फिर वही जबरदस्त चुदाई… पर इस बार वो रात के एक बजे चला गया था। खूब चुद कर मैं सो गई… पर सवेरे मेरी नींद समय पर खुल गई। मैंने फिर से बस में जाना शुरू कर दिया। दिन भर मैं विवेक से दूर रहती… और रात को मैं उससे खूब चुदवाती। तीन दिन बाद ही रजनी अपने माँ के यहाँ से वापस आ गई थी।

अब मुझे कौन चोदता? रात बड़ी लगने लगी… चूत में आग भरने लग जाती… दिल तड़पने लगता… फिर पेन या पेन्सिल… बैंगन… मोमबती… उफ़्फ़ क्या क्या काम लाती… लण्ड जैसा तो कुछ भी नहीं है… मुझे तो विवेक की बहुत याद आती थी। पर मन मार कर रह जाती… जाने कब मौका मिलेगा।

पर मेरी माँ कितनी खराब है… आप देखिये ना… मेरी शादी ही नहीं कराती है… प्लीज आप ही उन्हे कह दीजिये ना… अब नहीं रहा जाता है।

उफ़्फ़्फ़… क्या करूँ?

(TBC)…



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